भाषा / Language
हम क्या नहीं पाते विद्यालय जाकर
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हम क्या नहीं पाते विद्यालय जाकर.....
रोज़ नए नए किस्से
रोज नई नई यादें।
रोज़ नई नई मासूमियत
रोज़ नई नई शरारतें।
तस्वीर में मैं ,मेरे साथी, P. harendran ,Pradhiksha Lakshmi और प्यारी सी उनकी मां हैं।
आज से ठीक चार साल पहले हरेंद्रन का दाखिला मेरे विद्यालय में हुआ था। और दो साल बाद उसकी बहन भी मेरे यहां ही आ गई। उनके पिता डिफेंस में हैं और मां तमिल पढ़ाती हैं। दिल्ली तबादला होने पर हरेन्द्र के पिता खासे चिंतित थे कि मेरे परिवार को, मुझको हिंदी नहीं आती। मैं अक्सर बाहर रहता हूं।मेरे बच्चों की देखभाल आप सब करते रहना। बेहद सादा और God fearing इंसान।
इस बीच दो साल विद्यालय ऑनलाइन चला। हरेंद्र की मां और पिताजी ने घर से ही खूब अच्छी हिंदी सीख ली। उनकी मां खुद सारी क्लासेज attend करती रही बच्चों के साथ।
ये उनका हमारे साथ आखरी हफ्ता है।
हरेंद्र के पिता ने चिन्नई में घर बना लिया है और उनका स्थानांतरण भी वहीं हो गया है।
अगले हफ्ते उनकी फ्लाइट है। वे सब हमको छोड़ कर जा रहे। बेहद दुखी हैं कि साथ छूट रहा।
पिछले तीन दिनों से उनकी मां हमारे लिए रोज कुछ न कुछ पकवान बना कर ला रही ....
इडली डोसा चाय पकोड़े।
ये कहकर कि आप सबने मेरे बच्चों के साथ बहुत मेहनत की। मुझे सिखाया।
आप सबको हम याद रखेंगे।
आज हम सबने भी thanksgiving में बच्चों को उपहार दिए। उनकी मां हमारा स्नेह देखकर देर तक अश्रु धार में हमको भी भिगो गई।
शिक्षक के जीवन में ये अनमोल पल ही पूंजी हैं। हरेंद्रं का बेबाक अंदाज और उसकी बहन का पूरा श्रृंगार कर बड़ा सा गुलाब का फूल लगाकर स्कूल आना याद रहेगा। खूब प्यार और आशीर्वाद।
जहां जाओ वहां महक जाओ।
दूसरा वीडियो अनिरुद्ध क्लास पहली का है।
पिछले डेढ़ हफ्ते से स्कूल आ रहा।
बेहद खुश और हाजिर जवाब बच्चा।
मैं और मेरी टीम सुबह temperature check , sanitize करने और छोटे बच्चों के स्कूल आने पर उनके लिए गेट पर welcome के लिए रोज़ खड़े रहते हैं।
अनिरुद्ध आज सुबह बेहद प्यारा गुलाब लेकर आया।
मैंने पूछा अरे वाह। किसके लिए लाए हो?
बेहद शानदार जवाब देते हुए बोला... सबके लिए।
मैंने कहा एक और सबके लिए?
तो कहने लगा ...lalita ma'am से सब ले लेना।
उसकी प्यारी भावना देख कर दिन बन गया।
हम कितना सीखते हैं विद्यालय। ऐसा पावन माहौल बना रहे।
मेरे बच्चे,अभिभावक और विद्यालय परिवार मुस्कुराते रहें।
*तस्वीर zoom कर हरेंद्र की मां के आंसू देखिए। प्यार ही प्यार बेशुमार।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें