भाषा / Language
बिना परिंदे का आकाश देखा है
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*बिना परिंदे का आकाश देखा है?
मैं भी हूं आज वैसे
खाली
पर काश से भरी हुई।
* मेरे पास तुम नहीं हो
तुम्हारे पास भी मैं नहीं हूं।
हम दोनों किसी शायद में पास पास हैं।
प्रेम में इससे खूबसूरत जुगलबंदी क्या होगी।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें