कल्पनाशब्दों के बीच
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दुनिया में

दुनिया में अपने "दुखों" को और दूसरों के "सुखों "को "सहना" वाकई "हिम्मत"का काम है मेरी नज़र में पहला ....."अजब" और दूसरा ......"अजूबा" कहलाया जाना चाहिए ।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें