कल्पनाशब्दों के बीच
भाषा / Language
सभी रचनाएँ

रचना 3457

भाषा / Language

भरा और ख़ाली प्रेम दोनों ही मसखरे हैं

भरा और ख़ाली प्रेम दोनों ही मसखरे हैं... छलकते हैं इल्ज़ाम बेवज़ह आँखों के सर आता है।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें