भरा और ख़ाली प्रेम दोनों ही मसखरे हैं... छलकते हैं इल्ज़ाम बेवज़ह आँखों के सर आता है।
रचना 345711 फ़रवरी 2022भाषा / Languageहिन्दीEnglishभरा और ख़ाली प्रेम दोनों ही मसखरे हैं✦भरा और ख़ाली प्रेम दोनों ही मसखरे हैं... छलकते हैं इल्ज़ाम बेवज़ह आँखों के सर आता है।कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें