कल्पनाशब्दों के बीच
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हम साथ साथ सुंदर लगते हैं

हम साथ साथ सुंदर लगते हैं... ज़िन्दगी लिए खड़े रहते हैं और प्रेम लिए बैठ जाते हैं। सुनो.. स्मृतियों में अंगुली फंसाना अच्छी बात नहीं उलझी लट दुखती है बहुत। शुभ रात अभी इस वक्त की तस्वीरें हैं मेरे घर से
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें