कल्पनाशब्दों के बीच
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"फ़ब्ता "और "फ़ब्ती " के बीच

"फ़ब्ता "और "फ़ब्ती " के बीच मुझे सैंकड़ों बार रंगा है तुमने .... उसी लाल कूँची से तुम जानते थे ना ...... दूसरे रंग मुझे कमज़ोर नहीं होने देते ? गीला लाल रंग मेरी नब्ज़ में जम चुका गाढ़ा थक्का एक मेरे माथे पर सूखी खूनी पपड़ी वहां पड़ी है उस फब्ती पर कराह में राह ढूंढती हुई। लाल पर सवाल खारिज करती हूं।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें