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हमें खुद नहीं पता हम कितना प्रेम कर सकने के काबिल हैं

हमें खुद नहीं पता हम कितना प्रेम कर सकने के काबिल हैं... तुम सूरज रहा करना..... मैं हमेशा से सूरजमुखी हूँ
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें