कल्पनाशब्दों के बीच
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कुछ देर और जी लेती

कुछ देर और जी लेती .... उस रोज़ तुम्हारा "लम्हा" होना इतना जरूरी था? हर उदासी की मियाद तय होती है ....सुना था बस इश्क़ के लिए जरा क़ायदे मुलायम रखे हैं।
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