कल्पनाशब्दों के बीच
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प्रेम के दर्द

प्रेम के दर्द प्रेम की उदासी प्रेम के दुःख प्रेम की प्रतीक्षा प्रेम की हताशा सब प्रेम के साथ खिले फल, फूल, पत्ते और कलियां हैं । प्रेम खुद एक मनचाहा कंटक है उसी का चुभा दुखता है पर दिखता नहीं। हम नाहक उसके साथियों को *हाय* भेजते हैं। *कभी कभी सोचती हूं कि ये कहना कितना खूबसूरत होगा कि मेरे पास तुम्हारा प्रेम है। इससे ज्यादा रचनात्मक ,कलात्मक और दुखात्मक क्या हो सकता है। सब में आत्म है.... सब में आत्मा है। *****पहाड़ों पर वक्त से ज्यादा वक्त बच जाता है।सब कुछ स्थिर, सब कुछ धीमी गति से गुजरता हुआ। खूब सारे वक्त में खूब सारे तुम होते हो... इन अक्षरों में घुला घुला देना तुमको ।डूबे डूबे रहना। कुछ प्रेम किया।कुछ अप्रेम
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें