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रोज़ इंतज़ार के साथ ज़रा ज़रा मैं भी आती हूँ। जिस रोज़ लगे सिर्फ़…

रोज़ इंतज़ार के साथ ज़रा ज़रा मैं भी आती हूँ। जिस रोज़ लगे सिर्फ़ मैं आ गयी उस रोज़ तक देखते रहना .... उदास लड़की ने बादलों से कहा इंतज़ार संग निबाहने वाली शै है....यहीं हूं मैं। बादलों से प्रेमी ने झांक कर कहा। अरे तुम...बस रहने ही दो। तुम्हारी तसल्ली मीठा गुड़ है.... प्रेम की सर्दियां कट जानी है। मुस्कुराती लड़की ने शर्माते हुए हाथ से बादलों को इधर उधर कर दिया। प्रेमी बेचारा फिर लुक गया।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें