कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 3346

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हम दोनों दो शहरों में अलग अलग बातों पर हँसते हैं।

हम दोनों दो शहरों में अलग अलग बातों पर हँसते हैं। यही प्रेम को बचाये रखना है । मैं तुम्हारे मोह में पड़ गई हूं प्रतीक्षा पीछे छूट गई है। तुम मुझमें ही हो... इस बात को मेरी मुस्कान में पढ़ा जा सकता है। मेरी आंखों में देखा जा सकता है.... तुम्हारा सम्मोहन
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें