भाषा / Language
मुझसे निकल कर पिछले साल वाले सारे भरे पन्ने उड़ गए।
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*मुझसे निकल कर पिछले साल वाले सारे भरे पन्ने उड़ गए।
नई कोरी किताब आज फिर हूँ मैं।
नई ख्वाइशें ...नया प्रेम ....नई कल्पना सब का एक बार फिर आगाज़ हो।
😊😊
*तुम अपनी मौज़ूदगी से ज़्यादा अपनी आवारगी में फबती हो कल्पना
साल का पहला ताना... 😊
*बहुत गमों से गुजर कर कमाई है
ये हंसी ऐसे ही थोड़े आई है।
इक दोशीजां नज़्म ही है मायूसी
जो मैंने वाह वाह में उड़ाई है ।
दिल्ली वापस जा रही।जो जी आए लिखा जा रहा।memories में तस्वीर दिखाई दी। सिंगापुर की है।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें