भाषा / Language
पहाड़ हमेशा से एक तरफ़ा प्रेम में रहे
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पहाड़ हमेशा से एक तरफ़ा प्रेम में रहे ...
नदी के साथ साथ चले और उसके प्रेमी को सौंप आये उसका हाथ ।
नदी मैदान से पहाड़ों का दुःख कभी नहीं देख पाई।
और जब समझी सागर में अकेली डूब गई।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें