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मुझे तुम्हारा प्रेम मिले ...न भी मिले पर मुझे तुमसे धीरता…

मुझे तुम्हारा प्रेम मिले ...न भी मिले पर मुझे तुमसे धीरता मिले। मैं छोटी छोटी उपलब्धियों पर खुश हो जाने वाली स्त्री हूं। मां कितनी बातें बिना कहे कह जाती है।सीखने की नियत हो।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें