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आज मां और daddyji के साथ बैठ कर पुराने दिन और आजकल का मन बा…
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आज मां और daddyji के साथ बैठ कर पुराने दिन और आजकल का मन बांटा। स्कूल, घर ,परिवार ,बच्चे ,लोग, जिंदगी ,जिंदगी के झमेले, संस्कार, दुख ,आकांक्षा,सपने, रिश्ते ,रिश्तों की परख , सेवा भाव , स्व,स्वतंत्रता जाने किस किस बात पर बातें की।
मां बाप के साथ बैठकर गांठें खोलना सुखद रहा।
मेरी मां ने कहा किसी का बुरा मत करना।मन की सुनना।
ईश्वर हमेशा साथ रहेगा।
Daddyji ने कहा अपने लिए भी उतना ही मान रखना जितना तुम दूसरों को देती हो। ईश्वर साथ रहेगा।
मेरे मां पिताजी की सोच में बहुत अंतर है।पिताजी अपनी नजर से देखते हैं।गलत होते हुए देख नहीं सकते। आवाज़ उठाते हैं। बेहद सादे पर rock strong.Works for the system types not for the person.
मां मेरी दूसरों के बारे में पहले सोचती है।उसे दूसरों का दुख पहले दिखता है। वो खुद सह जायेगी पर मन किसी को नहीं कहेगी। माफ़ कर देगी आसानी से। कभी नहीं जताएगी कि किसी के लिए कुछ किया। भूल जाएगी। मोम सी ।पिघलती ठोस होती हुई।बारी बारी। अपनी सोच पर अडिग।un influential...unique
ना भी हां में लपेट कर देने वाली।
उन दोनों को कहती हूं आज भी कहा ...तुम दोनों का अंश हूं।इस बात का गर्व है।मां की काफी बातें मुझमें आ गई हैं। मैं खुद को उसकी ही फोटोकॉपी मानती हूं।daddyji सी जुनुनियत सीखनी बाकी है। आप अद्भुत हैं।
आज की सुबह बन गई। एक घने वृक्ष के नीचे घंटों तक बैठे रहने का सुख भोगा।
दिन शुभ रहे आप सबका। मन लिख देने की बीमारी है।लिख दिया है।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें