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तुम बस फासले कायम रखना

तुम बस फासले कायम रखना... प्रेम के छोर मेरे जिम्मे हैं। मैं दोनों रख लूंगी। इन आंखों की मस्ती के मस्ताने हजारों हैं.... Head phone पर रेखा जी झूम रहीं। थिरकन मन में है। रात रखने के लिए मर्तबान ढूंढ रही थी ... एक ख़ाली से तुम मिले और एक ये टूटा चाँद शुभरात💐💐💐
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें