कल्पनाशब्दों के बीच
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मेरे पसंदीदा

मेरे पसंदीदा .... कुछ लोग साथ नहीं होते बस पास होते हैं। मैं कहीं भी जाऊं कुछ किताबें मेरे साथ चलती हैं। आज मां के घर हूं।साथ ये सब भी हैं। धूप में लेटी लेटी इनके पन्ने पलटती रही। मां हंस कर बोली एक जरूरी समान तो तेरा ये रहता है। अब क्या कहूं.... जिनसे प्यार होता है वो बोझ थोड़े ही होते हैं। कुछ लोगों से प्रेम अनोखा है मेरा। सदा रहे। तुमसे सबसे अधिक है रे। खुद से भी अधिक।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें