कल्पनाशब्दों के बीच
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दिसंबर बहुत है मेरे पास

दिसंबर बहुत है मेरे पास ... तुम बस साल भर की धूप बने रहो .... हमेशा की तरह सफ़र में हूं।मां के पास जा रही कुछ दिन छुट्टियों में । संग दो इश्क़ में डूबे लोग हैं।किताब साथ हो तो वक्त का क्या करूं ... महसूस नहीं होता। इक बेहद रूमानी गानों नज्मों की लड़ी है । वो प्लेलिस्ट जो जाने कब से बदली ही नहीं। और ढेर सारा तुम हो... जो बदल ही नहीं सकते।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें