कल्पनाशब्दों के बीच
भाषा / Language
सभी रचनाएँ

रचना 3322

भाषा / Language

एक हद के बाद

एक हद के बाद हम अपनी सहूलियत के लिए दुख से भी सुख सोखने लगते हैं। ज़िन्दगी मांगती कब है ? बस चाहती जाती है... बेपनाह * तस्वीर पुरानी है पर मन में उदासी आज फिर नई है। वजह तुम हो।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें