कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 3315

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इससे दुखद क्या होगा कि तीन प्रेम आपस में कभी नहीं टकराए पर…

*इससे दुखद क्या होगा कि तीन प्रेम आपस में कभी नहीं टकराए पर एक को अकाल मृत्यु आ गई। *हम इस लिए भी मर जाते हैं कि मिलने और बिछड़ने की एक ही तारीख़ ...एक ही पल लकीर में लिखवा कर लाते हैं । *जो जो तुमसे मुझसे पहले प्रेम में पड़ा उसका तुम पर ज्यादा हक़ है। मैं इति तक हूं यहां मिलूंगी तुम को । *मेरा प्रेम भरा मन दरगाह है दरवेश की आरामगाह।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें