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रचना 3301

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रखने ही होंगे अगर तीन मनके तो तुम्हारा नाम रखूंगी

*रखने ही होंगे अगर तीन मनके तो तुम्हारा नाम रखूंगी ... उदासी क्यूं रखूंगी? * मैं हारती नहीं ... तुम जीतने नहीं देते। इससे ज्यादा कोई प्रेम क्या देगा। मुस्कान अभी अभी किसी बात को पढ़ कर आई है।देखिए तो जानी पहचानी है क्या ?
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें