कल्पनाशब्दों के बीच
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हमको सब देखते हैं

हमको सब देखते हैं.... मैं को सिर्फ़ मैं ही देख सकता है। ये दूसरा मैं .....ईश्वर है। वो मुझे मेरे इरादों से जानता है। मेरा होना निश्चिन्त करता है। सब हमको नहीं ...मेरे मैं के निश्चित काम को देखते हैं । निश्चिन्त मैं.... ईश्वर को देखता है। Never tame yourself.... Tame the I in you.
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें