ककल्पनाशब्दों के बीच
भाषा / Language
सभी रचनाएँ

रचना 3291

भाषा / Language

मन के दो टुकड़े हैं मेरे पास

✦
मन के दो टुकड़े हैं मेरे पास ... अपना हिस्सा उड़ा रखा है तेरा छिपा रखा है तुझे मैं जहां की नज़र से चुरा लूँ। शुभरात💐
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें