मैं उसे कितना भी ज़ाहिर कर लूं वो मुझे छिपा कर रखता है। कस्तूरी की तरह खुद में
रचना 328911 दिसंबर 2021भाषा / Languageहिन्दीEnglishमैं उसे कितना भी ज़ाहिर कर लूं वो मुझे छिपा कर रखता है।✦मैं उसे कितना भी ज़ाहिर कर लूं वो मुझे छिपा कर रखता है। कस्तूरी की तरह खुद मेंकल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें