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किसी के दर्द में काम आ सकें तो हम भी कम दर्द ए मंद हो जाते…

किसी के दर्द में काम आ सकें तो हम भी कम दर्द ए मंद हो जाते हैं।😊 जानते हैं? हम रिश्तों में दोस्त.... दोस्त में रिश्ते ढूंढते हैं । जबकि दोस्त में बस दोस्त और रिश्ते में सिर्फ़ रिश्ता ढूंढा जाना चाहिए। किसी के काम आ सकें तो न दोस्त न रिश्ता देखा जाए बस दर्द देखा जाय 😊 हाथ बढ़ाया जाए....राह दिखाई जाए। कोई भी उदास मन देख सुन समझ कुछ नहीं पाता। उसे जिलाया जाए। जिसके पास उदास मन खिलाने का हुनर होता है वही ज़िंदा है।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें