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पत्ते कम हो या परिंदे

पत्ते कम हो या परिंदे दरख़्त का दुःख एक सा है । मुझे तुमसे कुछ ऐसी विकलता चाहिए। 😊
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें