कल्पनाशब्दों के बीच
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नशा कोई भी हो....इकहरा ही अच्छा

नशा कोई भी हो....इकहरा ही अच्छा एक ही हो जहां भर में आज सुबह का हासिल😊 कबीर मन अभी ऐसा है जैसे प्यास को हथेलियों से ढँक कर बून्द को तक रहा हो। लिंक कमेंट बॉक्स में है... डूब जाएं ... तर जाएं शुभदिन💐
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें