भाषा / Language
तुमसे बस होना सीखा
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तुमसे बस होना सीखा ....
कभी गलत
कभी सही
उस गुलाब और इस सूरजमुखी जैसे
कभी सारे गुलाब जैसा प्रेम .....*सही*
कभी गुलाब के बगीचे में एक सूरजमुखी सा प्रेम.... *गलत*
तुमने मुझे सही गलत की लय ताल दी।
उपयुक्त जितना ही प्रेम किया
सही गलत के ठीक मध्य बिंदु सा
पर्याप्त
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें