एक रोज़ अनजाने ही मन रख दिया तुम पर .... सुखन की एक ही चीज़ थी मेरी खालिस । जहां चाही वहीं रख दी।
रचना 323014 नवंबर 2021भाषा / Languageहिन्दीEnglishएक रोज़ अनजाने ही मन रख दिया तुम पर✦एक रोज़ अनजाने ही मन रख दिया तुम पर .... सुखन की एक ही चीज़ थी मेरी खालिस । जहां चाही वहीं रख दी।कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें