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रचना 3229

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तुमसे इल्म का रिश्ता है।

तुमसे इल्म का रिश्ता है। रोज़ जरा जरा थोड़ा थोड़ा सा *ठहरे जल में रोज़ खिलता अकेला कमल तुम मुझमें खिल गए हो।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें