कल्पनाशब्दों के बीच
भाषा / Language
सभी रचनाएँ

रचना 3179

भाषा / Language

तुम्हारी चुप्पी इस लिए भी उदास करती है मुझे कि मैं जानती हू…

तुम्हारी चुप्पी इस लिए भी उदास करती है मुझे कि मैं जानती हूँ उसमें मेरे लिए बहुत सारे उत्तर छिपे हैं और मैं उन्हें बूझ नहीं पा रही हूँ .... मैं इंतज़ार में हूँ.... तुम्हारा इंतज़ार करते हुए मैं थक कैसे सकती हूँ? अपनी ही प्रतीक्षा में तुम्हारी ओर मुख करके खड़ी हूँ। मुझे मुझसे मिलाने मेरे मैं तक मेरे तुम आना😊 अब तुमको उम्मीद के रोशनदान से हटाकर यकीन के आले में धर लिया है। कहाँ हो तुम ?😊 लव यू कहना है।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें