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वो नकार कर मुझे एक बेहतरीन रूह बनाता जाता है। मैं बेसुध हव…

वो नकार कर मुझे एक बेहतरीन रूह बनाता जाता है। मैं बेसुध हवा से धीमी बयार बनने लगी हूँ अब इसके लिए मैं उसे प्रेम न करूँ तो क्या ही करूँ। *तुम्हें *संयोग* कहूँगी... तुम वैसे भी किसी के यूं ही हो जाने वाले शख्स हो ही नहीं😊
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें