कल्पनाशब्दों के बीच
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तुमने कॉल नहीं किया ।

तुमने कॉल नहीं किया । मैंने कॉल किया पर तुमने उठाया नहीं। क्या ये दो बातें एक सी हैं ?लड़की ने पूछा लड़के ने बेपरवाह होकर कहा... हाँ दोनों में ही बात नहीं हुई। लड़की ने कहा.... नहीं! एक में तुम नहीं थे दूसरे में तुमने होना नहीं चाहा । पर दोनों में मेरा नुकसान हो गया मैं फिर फ़िज़ूल रही। लड़के ने इतनी मीठी मुस्कान दी कि लड़की शहद हो गई।😊 *प्रेम में फ़िज़ूल होना भी प्रेम ही है। आप स्पर्धा में नहीं प्रेम में पड़ गए हो। सबर रखो। दरमियाँ शहद रखो
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें