कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 3152

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शब्दों से गुजरती हूँ तो

शब्दों से गुजरती हूँ तो... दरख़्त ,दरिया ,फूल, भंवर , दिन रात ,इस पल, पहर, खेत ,खलिहान, ये शहर , अब, अभी,वो हर गजर, राह ,राही , रहगुज़र , या, तो ,शायद, मगर , ज़ेहन, जिगर, मेरी नज़र, डग, डगर ,हर एक सफ़र, न्यून ,शून्य, बाक़ी सिफ़र , नैन ,काजल, प्यासे अधर , गीत, ग़ज़ल, उसकी बहर, पूरा शख्स ,वो आधा बशर कब ,कहां ,कैसे ,किधर ..... सब में तुम छिपे रहते हो ढूंढ कर ... तुम्हीं को लिख देती हूँ तलाश ... तीन अक्षरों से कविता थोड़ी ही होती है।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें