कल्पनाशब्दों के बीच
भाषा / Language
सभी रचनाएँ

रचना 3151

भाषा / Language

मिलोगे तो .....चिनार के सारे पत्ते दे दूँगी।

मिलोगे तो .....चिनार के सारे पत्ते दे दूँगी। हरे पीले लाल भूरे... तुम बस एक बार मुझे कल्पना कह देना।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें