कल्पनाशब्दों के बीच
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आज मेरे घर नीरज कृष्ण sir आये।

आज मेरे घर नीरज कृष्ण sir आये। आप का आना हमेशा ही सुखद होता है। आभासी मित्र से आप मेरी लिखने की ख़ब्त को सराहने वाले ....स्नेह बरसाने वाले ....गलतियाँ चुपके से बताने वाले बेहद सरल दोस्त बन गए हैं। आप से संवाद हमेशा सार्थक रहता है। विनोद भी आप से मिलकर बहुत खुश हुए। शाम खुशरंग बनाने का शुक्रिया sir💐💐 आते रहिएगा...आप जैसे सहृदय इंसान इस पटल पर शायद इक्के दुक्के ही हों। मेरी मित्रता सूची में आपका होना गर्व की बात है मेरे लिए। साथ बना रहे। 💐💐 शुक्रिया आपका
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें