भाषा / Language
ये सच है
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ये सच है ......
सरगम खामोश हो गयी
तुम्हारे जाने के बाद
पर.....
आज भी......
हर शाम आभास धरते हो
मेरे ख्वाब में .....
नया अंदाज़ भरते हो
रोज़ ज़रा सा गाकर
ज़रा सा गुनगुनाकर
महफ़िल ....
आगाज़ करते हो
रोज़ कहती हूँ ....
आज फिर कहूँगी ......
कहाँ तुम चले गए ?
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें