कल्पनाशब्दों के बीच
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सबके पास दिल नहीं होता

सबके पास दिल नहीं होता .... किसी किसी के पास एक कहानी भी होती है। मेरे सम्मोहन का नाम क्या है? क्या उसे लिखा जा सकता है? मैंने उससे पूछा.. उसने मेरे बालों में अटके मोरपंख को होले से निकाला और अपनी हथेली पर 3 रेखाएं उकेर दी। कहा ढूंढ़ लो... मैंने अनजाने ही अपने नाम का पहला अक्षर गढ़ा । मैं जानती हूँ वो चूमना तो मेरा माथा चाहता था पर उसने जान बूझ कर मोरपंख को चूमा और मेरे जूड़े में खोंस दिया।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें