बिखरते हैं ........खुद को समेट लेते हैं कुछ हैं ........कुछ लकीरें कुरेद लेते हैं शुभरात💐
रचना 309617 सितंबर 2021भाषा / Languageहिन्दीEnglishबिखरते हैं ........खुद को समेट लेते हैं✦बिखरते हैं ........खुद को समेट लेते हैं कुछ हैं ........कुछ लकीरें कुरेद लेते हैं शुभरात💐कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें