भाषा / Language
आपकी बात ....बात फूलों की
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आपकी बात ....बात फूलों की
* गमले में मोगरे खिले हैं आज...
ऐसे कौन आता है खबर लेने भला? ये तुम हो जानती हूँ मैं।
कभी कभी आ जाते हो तुम...
काफ़ी है।😊
*पूजा के फूलों में आज गुलाब मिले।
सोचा... उदासी को भिगो कर देखती हूँ कुछ देर
दिन भर तैरती रही...
एक टुकड़ा तुमसा अंदर अंदर नम सा लगता रहा।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें