कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 3066

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सही कहते हो

सही कहते हो ...... मैं लिखना नहीं जानती मैं तो सिर्फ पीना जानती हूँ ... कुछ समुन्दर खारा सा कुछ अँधेरा उतारा सा अपने शब्दों के straw से कभी इक सांस में कभी बस गुड़- गुड़ में कागज़ में कहाँ मिलूंगी मैं ? शब्दों में कहाँ दिखूंगी मैं ? मैं तो दिखूंगी बीती रात की बाती में या शायद किसी उदास पाती में हाँ ....मैं लिखना नहीं जानती पर मैं छूना जान गयी हूँ जीना जान गयी हूँ
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें