भाषा / Language
आस टूटती है तो दुःख नहीं होता बल्कि सोच में पड़ जाती हूँ कि…
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आस टूटती है तो दुःख नहीं होता बल्कि सोच में पड़ जाती हूँ कि अब तलक जो तुम साथ थे उसे फिर से कहाँ से ,कितना और क्या क्या पोछूँगी?
कब नई स्लेट लाकर वही नाम फिर लिखूँगी ?
मेरी आंखो में हाँ और न तो है पर आस की मृत्यु नहीं है।
फिर जब मन उसके लिखे से उदासी सोखे ... समझो प्रीत हुई ।
*तस्वीर इस लिए मुस्कुरा रही कि डेढ़ घंटे योग सेशन पूरा हुआ।वजन तो कम होता नहीं पर मन रंगबाज़ हो जाता है।
😊😊😊😊
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें