कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 3017

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मैं अब तुम्हारी मौजूदगी से भरी रहती हूँ।

मैं अब तुम्हारी मौजूदगी से भरी रहती हूँ। उपस्थिति का इससे कोई लेना देना नहीं। 💐💐सदा ऐसे ही मिलूँगी
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें