कल्पनाशब्दों के बीच
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तुम चाँद

तुम चाँद ...... तुम्हारे हिस्से में पूरा आसमान तुम्हारी नीली चांदनी और तो और ये रात भी सगरी तुम्हारी और मैं ? मैं तो बस ........मैं इक दिन हो सके तो मेरी अपेक्षाएं भी ......ओढ़ कर देखना बेहद अलग लगोगे सिर्फ़ इक बार बस .....यूं ही *लिफ़ाफ़ा ख़ाली पहुँचा है.... दस्तक कहीं गिर गई शायद महफ़िल बर्खास्त हुई.... सुनिए😊😊😊 शुभरात💐
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें