कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 2998

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वक़्त को भी वक़्त की दरकार रहती है

वक़्त को भी वक़्त की दरकार रहती है तवज्जो न दो तो पलट जाता है। फिर मैं तो इंतज़ार हूँ।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें