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मुकम्मल ग़ज़ल है उदासी

*मुकम्मल ग़ज़ल है उदासी.... बस...रख लो। प्रेम में उसका दिया यही एक तिलिस्मी तोहफ़ा याद है मुझे। *तुम्हारे सामने चेहरा नहीं होती ... नाम भी नहीं.... बस होती हूँ ....पहाड़ी नदी अशांत शुभरात💐
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें