कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 2981

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मैं खलल हूँ।

मैं खलल हूँ। तुम तो मुहब्बत हो।😊 शुभरात💐
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें