कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 2978

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सब कुछ हमेशा से है मेरे पास।

सब कुछ हमेशा से है मेरे पास। वो तो तुम्हें कमतरी का एहसास न हो ...इस मारे ख़ाली हो जाने का जादू बिखेरे रखती हूँ। झुक कर तुम को उठा लेने की यही ज़िद्द मुझमें तुम्हें औरत दिखती है। "गुमान" और "गुमाँ" में क्या ही फ़र्क़ दिखाऊँ तुझे और कितना दिखाऊँ? रहने देते हैं। होने पर क्या प्रश्न रखना? मैं हूँ । बस। शुभरात💐
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें