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गुज़ारिश इतनी सी

गुज़ारिश इतनी सी .... तुम मेरे लिए हमेशा से confession box की तरह रहे हो।जब तक खुद को कह न दूं आराम नहीं आता। तुम्हारा शायद पलट के जवाब न देना मुझे और ज्यादा सच्चा बनाता जा रहा है। अब ये क़ुबूल कर चुकी हूँ कि यहाँ आवाज़ इक तरफ़ा ही जाती है। पर मुस्कुराता सन्नाटा वापस आता है । सच कहती रहूंगी.... confession box ! तुम मेरे सच...... मेरी चाहना यहीं जमे रहने देना ।मुझे राहत रहेगी। सुनो! मुझे कह देने की लत है पर तुम भी मेरी सुन लेने की आदत बनाये रखना । गुज़ारिश इतनी सी .... *मेमोरीज बेनाम ख़तों की सहेज है।वहीं से चुरा कर तुमको भेज रही।😊 शुभरात💐 मंज़र तुम्हारी याद से भरा है.... इससे बड़ी दुआ इस पल क्या होगी... यही रख लो😊
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें