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इतने तो लोग हैं जहां में और उतनी ही कविताएं

इतने तो लोग हैं जहां में और उतनी ही कविताएं.... फिर मुझे तुम सब की कविता में क्यूँ दिखते हो? क्या सब तुम को लिखते हैं ? या मुझे बस तुम दिखते हो .... शुभ रात💐
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें